गुनहगार:-विजय

लुट रही थी आबरू जबतब कहाँ थी वो टोलियाँअपने पालतू के खरोंच परचलवा देते थे जो गोलियांकौन थे वो तानाशाहीकौन थे वो मंत्रियांजिनके कहने पर सरदारों केगर्दन पर चल रही थी छुरियांज्ञान-पुत्र पर किसने चलवाईअनगिनत बार लाठियांआपातकाल की आग मेंकिसने सेंकी थी स्वार्थ-रोटियांकहते है जो लोग यहाँभीड़ की न होती धर्म-जातियांलोग फिर वो कौन थेजला गए मासूम से भरी वो बोगियांभीड़ घाटी में जब नोंच रही थीबहु-बेटियों की बोटियांमौन तब वे क्यों खड़े थेतथाकथित धर्मनिरपेक्ष की टोलियां चुन-चुन कर दिया घर निकालाकण्ठ से न फूटीं किसी की बोलियांआज गूंगे भी चीख रहे हैंदेश टुकड़े करने की मांगते आज़ादियाँरंग गाढ़ा दिखता है आजफीकी कल तक थी जो स्याहियांदर्द उनका न कोई उकेराठहाकों को उकेर रही आज कूचियांदौड़ कौन था लोग कौन थेजब बँट रहे थे हिन्द-वासियाँगुनाहगार वो लोग कौन थेजब रक्त-रंजित हुई हिम-घाटियाँआज भी नजरें जब उठतीदिखती चारों तरफ बस अर्थियांमातम का अँधेरा पसरा हुआ हैहर घर की बुझ रही है रोशनियां By:-VIJAY

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4 Comments

  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 12/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 12/01/2020
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 16/01/2020

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