तेरी खुशबू तो महके है – शिशिर मधुकर

नशा तुझसे मुहब्बत का हर घड़ी हम तो करते हैं जाम में डूब के ही दर्द सब दिल के उतरते हैं भले होती हो रुस्वाई मगर ना डर कोई हमको कोई पूछे जो सच्चाई कभी हम ना मुकरते हैं नशे की लत लगी जिनको करोगे क्या भला उनका लाख वादे करें झूठे मगर वो ना सुधरते है फकत मस्जिद में जाने से खुदा मिलता नहीं सब को मगर इक आस रहती है तभी सब जा सिमरते हैं भले तू ना मिले हमसे तेरी खुशबू तो महके है तेरी गलियों से जब भी हो के हम मधुकर गुजरते हैं शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. vijaykr811 09/01/2020
    • Shishir "Madhukar" 15/01/2020
  2. C.M. Sharma 15/01/2020
    • Shishir "Madhukar" 15/01/2020

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