थप्पड़ – शिशिर मधुकर

तड़पने के सिवा अब पास में कोई ना चारा है नहीं आता है वो नजदीक जो जां से भी प्यारा है कौन कहता है कि कर लो दुआ मिल जाएगी नेमत मेरा तो हाथ है खाली भले कितना पसारा है बड़ी मैं थी मुझे ये सोच मैं सच पे चला हूं बस समय ने गाल पे मारा मगर थप्पड़ करारा है दवा लीं हैं मगर ना रोग मेरा जड़ से मिट पाया तेरी यादों ने आ आ के दर्द हरदम उभारा है तरस उनको नहीं आता मुझे मझधार में छोड़ा डूबता जा रहा मधुकर नहीं मिलता सहारा है शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. vijaykr811 09/01/2020
    • Shishir "Madhukar" 28/01/2020
  2. C.M. Sharma 15/01/2020
    • DEVESH DIXIT 23/01/2020
      • Shishir "Madhukar" 28/01/2020
    • Shishir "Madhukar" 28/01/2020

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