मर्ज – शिशिर मधुकर

बिना तेरे अधूरी हो गई है जिंदगानी ले मेरे दिल से नहीं निकले है अब कोई कहानी ले मनाते रह गए तुझको मगर डर मिट नहीं पाया यूंही तनहा गुजरती जाती है मेरी जवानी ले घिरे थे हर तरफ चालाक और मतलब परस्तों से भुला लम्हें वो उलफत के हुई तू भी सयानी ले इस कदर दूरियां तुमने बनाई हैं जो अब मुझसे अरे कुछ पास आ फिर से और कोई निशानी ले मर्ज तेरा हो या मेरा ठीक यूं ही नहीं होगा दवा कहता है ये मधुकर तू अब वो ही पुरानी ले शिशिर मधुकर

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