वकत – शिशिर मधुकर

तू जब भी खिलखिलाकर कर के मेरे से बात करती हैउमंगों के हसीं जज्बात लाखों मन में भरती है तू औरत है बिना तेरे नहीं कुछ भी वकत मेरी तुझे पा के ही मुझ को हर ख़ुशी मिलती कुदरती है मुहब्बत नीर है तेरा एक नदिया की धारा सा बहेगा जिस जगह भी ये वहां सूरत निखरती है खोजता हूं मैं दीवानी कोई जी बांध ले मुझको उस घड़ी इक फकत तेरी छवि दिल में उभरती है भले तू ना कहे मुझसे मगर मैं जान लेता हूं हर समय प्रेम की माला तू मधुकर की सिमरती है शिशिर मधुकर

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