ये कैसी आज़ादी:-विजय

जो मांग रहे हो तुम आज़ादीफिर लेते क्यूँ नही आज़ादीघर-बाहर आग लगाकर तुमदेश की कर रहे क्यूँ बर्बादीसविंधान की बात करने को आदीखुद ही क्यूँ बन बैठे तुम बागीरक्षा सविंधान की निकले हो करनेपर कानून तुम्हे न उसकी राजीकहते हो तुम्हारे भगवान है गांधीचारो ओर हिंसा की फिर क्यूँ है आंधीतख्ती के बदले पत्थर हाथो में लेकरमांग रहे तुम ये कैसी आज़ादीहो बन बैठे तुम राग-दरबारीझूठी खबर के बन गए तुम वादीबात सही तुमने न जानीकानून हाथ मे लेकर करते मनमानीमजहब की आड़ में हिंसा के रागीझूठी अफवाहों के तुम फरियादीदंगे न सहेगा अब कोई भारतवासीएक खरोंच भी देश पर तुम्हे पड़ेगा भारी By:-VIJAY

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8 Comments

  1. Ghanshyam Manjhi 23/12/2019
    • vijaykr811 vijaykr811 24/12/2019
  2. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
  3. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 01/01/2020
  4. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
  5. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 01/01/2020

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