गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीत

दिल खोल कर दिखाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।ऐसे – कैसे हम बतलाएंकहाँ – कहाँ पर ऐसे जाएं।मीठी बातों में बहलाकेअपनापन भी खूब दिखाएं।।इनका पता लगाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।।बात पते की सब करते हैंदेख दिखावे पर मरते हैं।अपने मन की प्यास जगातेदिल में अपने आग लगाते।।इस ज्वाला को बुझाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।।कुछ कर्म का दोष है होताकोई किस्मत पर है रोता।देख लो आपस में तन गयेजब सभी पत्थर ही बन गये।।उसमें हीरा पाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।।गिरगिट सा कुछ चाल बदलतेमीठी सी बातों में छलते।गरमा – नरम जलेबी निकलेकुछ के चाल फरेबी निकले।।फ़र्ज अपना निभाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।।क्षण भर में ही दिल देते हैंबार – बार ही मिल लेते हैं।तड़प प्यार का सहा कहाँ कबप्रेम का मतलब रहा कहाँ अब।।रिश्ता नया बनाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।।

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