ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ग़ज़लथोड़ा सा हंँसा कर, रूला दिया हमेंमुहब्बत किस काम की, भुला दिया हमें।अभी खुमार चढ़ा ही था, इन आँखों परअक़ीदा – ए- इश्क ने सुला दिया हमें।अब न होश था, ना कोई खबर उनकीघड़ी बीच लोलक सा, झुला दिया हमें।न चैन, न होठों पर, मुस्कान थी मेरेजिगर पत्थर का था, डुला दिया हमें।किसी से कम, हम भी न थे, जमाने मेंरूप का जाल ने, उलबुला दिया हमें।तंहा रह गया “बिन्दु”, न गिला कियाबेवफ़ा , बेदर्दी ने , रुला दिया हमें।

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  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 17/01/2020

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