हाल -ए -दिल (गजल)

लबों पर तो है तबस्सुम ज़रा सा मगर,दिल है ज़ख़्मों से भरा हुआ इस कदर ।गम-ए -दाग दिखा सकते हैं भला किसे? ,कोई हमदम नहीं है हमारा न हमसफर ।यह दर्द कुछ अपने भी और कुछ पराये भी ,सुनने के लिए किसी में हो तो ज़रा सा सब्र ।अगर कह भी दी अपनी दास्तां तो सुनेगा कौन ?वक्त  के हाथो मजबूर औ मसरूफ़ है हर बशर।कह देने से हाल -ए-दिल अफसाना न बन जाए ,बेहतर है खामोश रहना ‘अनु’ तन्हाई ओढ़कर।    

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply