ढूंढता हूँ:-विजय

फ़ना हो जाऊँ इश्क़ में
ऐसा सनम ढूंढता हूँ
गुम हो जाये पहचान
ऐसा नयन ढूंढता हूँ

तिनको में बिखेर दे दिल
वो आँचल का हवा ढूंढता हूँ
कैदी हो जाये दिल
वो दिल-जंजीर ढूंढता हूँ

तरसे देखने को नजर
वो हीर-हुस्न ढूंढता हूँ
छीन ले सुकून जो सारा
वो कहकशी आवाज ढूंढता हूँ

जख्म बना दे दिल पे
वो नैन-तीर ढूंढता हूँ
कर दे मदहोश मुझे
वो अंग-सुगंध ढूंढता हूँ

भूल जाऊँ मैं जन्नत
वो आगोश ढूंढता हूँ
तरंग अंग-अंग हो जाए
वो छुअन ढूंढता हूँ

तीव्र कर दे धड़कन को
वो नजदीकियां ढूंढता हूँ
बदल दे तकदीर को
वो पाक-कदम ढूंढता हूँ
By:-VIJAY

4 Comments

  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
  2. deveshdixit DEVESH DIXIT 01/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 01/01/2020
    • deveshdixit DEVESH DIXIT 05/01/2020

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