निर्भया:-विजय

नर होकर भी मन मेरारात जागते करूँ सवेराजिधर सुनो चीत्कार मचा हैसरेआम भेड़िया नाच रहा हैखुले घूम रहे है अब रावणचीर हर रहे हर गली दुस्सासनइससे भी न भूख मिटा हैजिंदा को ही दानव ने जला दिया हैन कोई अब राम बचा हैकृष्णा जैसा न अब सखा रहा हैआस लिए अब किसके बेटी पालूडर को मन से कब तक मैं टालूसूख गए सबके आंखों के पानीन बचा यहाँ पर कोई दिल इंसानीवहशीपन ऐसा दानव पर है छायालाशों को भी नोच-नोंच कर है खायाघूंट-घूंट कर कब तक जीना होगाखून के आँसू कब तक पीना होगावक़्त है अब सख्त कदम उठाने कोअब दानव को चौराहों पर लटकाने दो

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4 Comments

  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 04/01/2020
  2. vijaykr811 vijaykr811 04/01/2020
  3. deveshdixit DEVESH DIXIT 05/01/2020
    • vijaykr811 vijaykr811 05/01/2020

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