‘‘मैंने एक कविता लिखी है’’

मैंने एक कविता लिखी हैआईए…मैं सुनाता हुँअच्छी लिखी हैमैंने एक कविता लिखी हैआपको पसन्द आएगीसमसामयिक लिखी हैहँसी के फुहारे भी हैंगुदगुदी होगीमन को भाएगीमज़ा आ जाएगाताज़गी आ जाएगीमैंने एक कविता लिखी हैआईए….मैं सुनाता हुँभैया आईए न..बहन आप आओ..चाचा, चाची,सर, महाशयछोटे भाईमुन्ना, मुन्नी,दादा-दादीआईए…मैं सुनाता हुँ…एक प्यारी सी कवितामैंने लिखी है….क्या कहा?कल?अरे। नहीं भैयादीदी, चाचीआज सुन लोअभी सुन लोछोटी कविता हैअच्छी कविता हैमेहनत से लिखी हैदिन में सोंचकररात में जागकरभूख को मारकरएक प्याली चाय मेंमैंने एक कविता लिखी हैअच्छी लिखी हैक्या?आज नहीं?अच्छा.. परसों?पक्का न….सुनेंगे न…वो…………..वाहजरूर सुनेंगेमुझे सुनेंगेबड़ी खुशी मिलेगीआपको दुआएँ मिलेगीआप खुब फुलेंगे-फलेंगेतरक्की करेंगे….मेरा हौसला बढ़ेगामेरी कविता सुनी जाएगीकवियों का यही तोहाल है….कवि श्रोता से कंगाल हैसुना था…लिखना गुण हैजो लिखता हैवह निपुण हैइसीलिए…..आँख फोड़करजागता हुँऔर…..लिखता हुँमैंने एक कविता लिखी हैआईए…मैं सुनाता हुँअच्छी लिखी हैमैंने एक कविता लिखी हैआपको पसन्द आएगीमैंने एक कविता लिखी है- नवीन कुमार ‘‘आर्यावर्ती’’

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/12/2019
    • Navin Kumar "Aryawarti" 06/12/2019

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