कितनी बेबस थी तू

आज रो पड़ा हैं बादल,

बन कर तेरा दर्द अकेला।

चाँद-तारे भी हो गए हैं अदृश्य।

क्यूंकी आज फिर से किसी बेटीऔर बहन का,

हुआ हैं चीर-हरण।

अरे नारी क्या वजूद कर दियाहैं तेरा इन हेवनों ने,

बनाकर तुझे अपना भोजन, खा लिया इन भूखे राक्षसो ने।

आकाश भी आज काले मेघो से गिराहैं,

बनकर तेरा दर्द तुझे अपनेसिने से लगाकर रो पड़ा हैं।

ना पवन सही से चल पाई हैं, ना ही सूरज सहीं से उग पाया हैं,

क्यूंकी आज एक बहन का फिर से कलयुगके हेवानों ने चीर-हरण कर डाला हैं।

आज रो पड़ा हैं बादल,

बन कर तेरा दर्द अकेला।

तुझे बचाने ना तो तेरा कोईभाई आ सका था,

ना ही खुदा का कोई फरिश्ता।

कितनी बेबस और लाचार थी तू,

जो ना बचा सका था तुझे तेरासिंदूर, ना ही तेरे राखी का कोई डोरा।

आज रो पड़ा हैं बादल,

बन कर तेरा दर्द अकेला।

तू चीखती रही बिलख्ती रही,

तेरी चीख को निर्जीव वस्तुओके अलावा

ओर कोई नहीं सुन पाया।

समझ कर तुझे अपने घर का कचरा,

फेंक दिया था खुद से दूर।

रास ना आई तेरी धड़कन,

तो बंद कर दिया था उसका सुर।

ना जाने कोनसा सुरूर उनके मनमें छाया था,

जो फेंक कर तुझ पर द्रवप्रदार्थ अपने हाथो से तुझे जलाया था।

आज रो पड़ा हैं बादल,बन कर तेरा दर्द अकेला।                                                                     

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