शक अब कर नहीं सकते – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमको तो शक अब कर नहीं सकते
खुदा की मर्जी के रिश्ते यूं पल में मर नहीं सकते

किसी में जो भी हम चाहें सभी होता नहीं हासिल
खुद के हाथों तो हर इक खासियत तुम भर नहीं सकते

बिना कुदरत की मर्जी के कभी कुछ भी नहीं होता
कहो ना कमतरों पे फूल कि तुम झर नहीं सकते

जो भी कुछ तय किया तुमने अगर पछताओगे उस पे
कभी भंवरों से तुम अवसाद की उभर नहीं सकते

भले मीरा की भक्ति में श्याम उठ के चला आए
मगर राधा की नेहा को भुला ईश्वर नहीं सकते

शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/12/2019
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/12/2019

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