रूमाल की तरह – शिशिर मधुकर

जो तुमने कह दिया मुझसे अगर मैं तुम से कह देता
मुहब्बत के महल को ढाहने की एक शह देता

अगर रूमाल की तरह से सबकी जिंदगी होती
इसे अनुसार अपने कब का मैं भी आ के तह देता

दो रूहों का मिलन तो देखो अपने आप होता है
खुदा तुमको कभी इसकी नहीं चलने वजह देता

अगर बातें मेरी तुमको ये सारी झूठ लगती है
अपने दिल की दीवारों बीच ना कोई जगह देता

अगर ना पेश आऊं मैं रवायत ध्यान में रख के
कभी सोचा करो मधुकर तुम्हें कितनी कलह देता

शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2019
  2. डी. के. निवातिया 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2019

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