सच को जाना है – शिशिर मधुकर

खुदा ने जो दिया मुझको उसे अब मैंने माना है
यही खुशियों का रस्ता है असल इस सच को जाना है

सताएंगे नहीं खुद को सोच के फ़ालतू बातें
बचा जीवन मुझे तो इक फकत हंस के बिताना है

पेड़ तो एक होता है मगर उसमें भी देखो तो
फूल ऊंचाई और नीचाई पे पाता ठिकाना है

किसी को क्या फर्क पड़ता है तुम जो दर्द पीयोगे
अपने हाथों से खुद की आत्मा को ये सताना है

मुझे वादा करो तुम अब हमेशा मुस्कुराओगे
मुहब्बत का हसीं रिश्ता हमें मिल के निभाना है

शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2019

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