देता नहीं हूं दगा मैं – शिशिर मधुकर

मेरा दर्द उसने पढ़ा तो अपना सा उसको लगा मैं
उसको समझ झट से आया देता नहीं हूं दगा मैं

जिसको भी अपना बनाया रिश्ते को हरदम निभाया
जिसने मुहब्बत लुटाई उसका बना हूं सगा मैं

बेचैनियां गर तुम्हें हैं मैं भी हूं खासा परेशां
यादों में तेरी ना सोया रातों से बस हूं जगा मैं

इतिहास मेरा पढोगे मायूस फिर कुछ ना होगे
धोखा ना मैंने दिया है जाता रहा हूं ठगा मैं

बस प्रेम की आरजू है जिसको समझ में ये आए
उसके पैरों में मधुकर कहे है रखता हूं अपनी पगा मैं

शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/12/2019
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/12/2019

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