गजल

गम और तन्हाइ का अन्दाज न होता
सफर मे वो अगर दगावाज न होता

फूल चुनते हुए चुभते नही काँटे
इश्क करने को गर मिजाज न होता

न जान पाते पाडोसी की टुटा क्या है
दिल टुटने का कोइ आवाज न होता

आदत बन गयी थि साथ सोने उठ्ने की
वरना उनकी दिदार की मोहताज न होता

ईतिहास ने बना दि वफावों का कहानी
वर्ना इश्क, मोहब्बत का अल्फाज न होता

हरि पौडेल
नेदर्ल्याण्ड
०५-०३-२०१८

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2019

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