ऐसा करके तो देखो : “गोपी”

हम लिखेंगे गीत ग़ज़ल नज़्म आपके लिए
कभी सोलह सिंगार करके तो देखो
निहारा करेंगे सुबह से शाम तक
कभी ऐसा ही कुछ संवर के तो देखो
चाहेंगे आपको दिल की गहराइयों से
कभी इस दिल में उतर के तो देखो
छलकती हैै आंखे मेरी आपकी खातिर


कभी इनमें उतर के तो देखो
पढ़ता है यह दिल धड़कन की भाषा
कभी इसके लिए तड़पके तो देखो
ऊपर ही से देखते हो दुनिया का नजारा
कभी छत से नीचे उतर के तो देखो
रंगहीन क्यों कर ली है तस्वीर जीवन की
कभी ख्वाहिशों में रंग भर के तो देखो
आवारागर्दी में शामिल नहीं है हम
कभी हमारी गली गुजर के तो देखो
मरकर भी याद आएं इस दुनिया को
“गोपी” ऐसा ही कुछ करके तो देखो

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6 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 05/12/2019
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/12/2019
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 05/12/2019
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/12/2019
    • Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 05/12/2019

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