जिधर देखो उधर मेहनत -सलीम रज़ा

जिधर देखो उधर मेहनत कशों की ऐसी हालत हैग़रीबों की जमाअत पर अमीरों की हुक़ूमत हैग़रीबों के घरों में रहबरों देखो कभी जा करवहां ख़ुशियां नहीं हैं सिर्फ़ फ़ाक़ा और ग़ुरबत हैकहीं अस्मत फरोशी है कहीं नफ़रत कहीं दहशतज़माने में जिधर देखो क़यामत ही क़यामत हैकभी कलियों का मुस्काना कभी फूलों का मुरझानाये क़ुदरत के तकाज़े हैं यही गुलशन की क़िस्मत है’रज़ा’ साहिब चलो ग़ोताजनि कि मश्क़ करते हैंसमुन्दर के ख़ज़ाने में बड़ी अनमोल दौलत है

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/11/2019
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 22/11/2019

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