यह कैसा नया दौर है : “गोपी”

वह खत लिखना, वह जवाब का  इंतजार अब कहां

जो आंखों ही आंखों में हो जाता है वह प्यार अब कहां

वह ख्यालों की दुनिया मन ही मनमुस्कुराना

वो ख्वाहिशें वो चाहतें वह आंखो मेंखुमार अब कहां 

खत लिखना भूल गए आजकल व्हाट्सएप आता है

तसल्ली नहीं किसी को हर कोई तुरंत जवाबचाहता है

इस तकनीक के दौर में जिंदगी के मायने बदलगए

सुनता नहीं कोई किसी की, अपनी सुनाना चाहता है

लिखता नहीं कोई आजकल, बस फॉरवर्ड पर जोर है

आदमी पड़ गया है अकेला, जबकि हर तरफ खूब शोरहै

कभी सुख दुख की बातें बैठकर बतियाते थे

मेल मिलाप बंद हुआ अब फेसबुक व्हाट्सएपका दौर है

गुरुकुल के जमाने में गुरु का सानिध्यमिलता था

शिष्य ज्ञान से पल्लवित हो सुमन समानखिलता था

वह गुरु के सानिध्य में ज्ञान पाना खोगया है

आज का गुरु तो बस गूगल बाबा हो गया है

✍ रामगोपाल सांखला “गोपी”

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11 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 18/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla 19/11/2019
  2. Shishir "Madhukar" 19/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla 19/11/2019
  3. Bindeshwar prasad sharma 19/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla 19/11/2019
  4. Ram Gopal Sankhla 19/11/2019
  5. C.M. Sharma 20/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla 27/11/2019
  6. डी. के. निवातिया 22/11/2019
    • Ram Gopal Sankhla 27/11/2019

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