इबारत – शिशिर मधुकर

आया हूं तुमको मनाने अब ना बनाओ बहाने
मुझको दीवाना बना के अब तुम लगे हो सताने

झूठी तसल्ली जो दोगे विश्वास मन का हिलेगा
आएगा फिर ना समर में कोई भी तुम को बचाने

दूरी ना इतनी बढ़ाओ बापस जो ना कोई आए
चले आओगे चाहे फिर तुम खुद ही से उसको बुलाने

उलफत में जो भी लिखा था मिटता नहीं जिंदगी भर
फिर क्यों लगे तो खुद ही से तुम ये इबारत मिटाने

अवरोध माना कई हैं कोई ना पर साथ देगा
मिल के हमें ही हैं मधुकर सारे ये खुद ही हटाने

शिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. C.M. Sharma 20/11/2019
    • Shishir "Madhukar" 20/11/2019
  2. डी. के. निवातिया 22/11/2019
    • Shishir "Madhukar" 23/11/2019

Leave a Reply