निडर – शिशिर मधुकर

तेरी मुहब्बत का देखा कितना असर हो रहा है
जज्बा दबा था जो दिल में खुल के मुखर हो रहा है

तनहा सी जो जिंदगी थी उसमे बहारें हैं आईं
हंसते हंसाते हर इक पल अब तो बसर हो रहा है

मुस्कान तेरी का जादू होने लगा है जहन पे
परदा कोई बीच में अब समझो कहर हो रहा है

हालत बताएं क्या तुझको कटती है कैसे हमारी
धड़कन मचलती हैं तेरी दर्द पर इधर हो रहा है

मधुकर को समझा है तूने हाथों को आगे बढ़ाया
तुझे जान के अब तो वो भी खासा निडर हो रहा है

शिशिर मधुकर

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