अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब को- #salimrazarewa

अपने हसीन रुख़ से हटा कर नक़ाब कोशर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब कोउनकी निगाहे नाज़ ने मदहोश कर दियामैं ने छुआ नहीं है क़सम से शराब कोदिल चाहता है उनको दुआ से नावाज़ दूँजब देखता हूँ बाग़ में खिलते गुलाब कोये ज़िन्दगी तिलिस्म के जैसी है दोस्तोक्या देखते नहीं हो बिखरते हुबाब कोजुगनू कहीं न आए मुक़ाबिल में एक दिनये बात परेशां किए है आफ़ताब कोइन्सान बन गया है ‘रज़ा’आदमी से वोदिलसे पढ़ा है जिसने ख़ुदा की किताब को

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5 Comments

  1. Dr.M.C. Gupta 17/11/2019
    • SALIM RAZA REWA 29/11/2019
  2. vijaykr811 18/11/2019
  3. SALIM RAZA REWA 29/11/2019

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