एक चिथडा सुख

एक चिथडा सुखएक चिथडा सुखलिपटा आशा के बिछावन मेंरखा आवश्यकताओ के चंवर मेंघिरा संभावनाओ के भंवर मेंअब अभावों के गंदे सीवर मेवो एक चिथडा सुख कहींअटक गया है.$$सूत्र कहते है बदलती जरूरत केबीच कहीं भटक गया है ÷×+श्वास बढ रही हैनही घट रही हैचेहरे की इबारते रोजसिमट रही हैदायरे की दीवारेंदरक रही हैंआँसू की सीलनछलक रही हैंतन के बीच मन की फांसइंच इंच बढ़ रही हैलालसा सुख सुखबडबडाते नये दुःख ओढ़ रही हैंआह! एक फर्लांग सिकुड़ा भूखहाय@ एक चिथडा सुखवस्तु नहीं भावों का अभावइंसान नहीं उसकी हैसियत से लगावश्रम की इबारते कर रही दुरावशाम सुबह एक शबहहाय!$बिछड़ा सुखउफ एक चिथडा सुखपवन पाठक

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