मेरे युग का मुहावरा है फ़र्क नहीं पड़ता

मेरे युग का मुहावराहै फ़र्क नहीं पड़तामैं जागा हूँ या सोयापाया हूँ या खोयाक्या लिया क्या दियाअपना लबादा फाड़ केअपने से सीयाचल रहा पर टूटतीनहीं जड़तामेरे युग का मुहावराहै फ़र्क नहीं पड़तारोड पर होतीदुर्घटना सेना असर माब लीचिंगकी घटना सेमेरा कद बढ़ेदिल्ली से या पटना सेनही वास्ता मेरा किसीनवीन समाज की रचना सेमेरे साथ एक फ्लैटअटैचजिसमें एक जर्जरबुढ़िया को रोज आता अटैकबेटा फाॅरेन में सेटलमहीनों पर करता बातयही है आज का क्यापखुद की बंद गली मेदिन रात सिकुड़ताफिर भी कहताफ़र्क नहीं पड़ताविचार से न्यूनभाव से शून्यहृदय से दूरावमतलब से लगावहाथ में घड़ीचेहरे पर हडबडीबायें अक्श लाचारीदायें बरक्श मक्कारीस्वार्थ का पहनावाअपनापन का दिखावापैसे का चढ़ावाराष्ट्रीयता का ओढ़ावाकल का फिक्रफ़ैशन का जिक्रमुझे कुछ नहीं दिखताजब तकमेरा जख्म दूसरे का लहू बन नहीं झड़तातब तक.मेरे युग का मुहावरा हैफ़र्क नहीं पड़तापवन पाठक

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