आधा आधा – राकेश आर्यन

चलो कुछ वक्त हमदोनो का आज बांट लेते हैं
तूम खूबसूरत सुबह रख लो हम शाम रख लेते हैं
मैं शायर हूँ तो फिर ये मुझको मेरी आवारगी रही
तूम सादगी रख लो तुम्हारे लिए तुम्हारी सादगी ही सही
मेरा प्यार तुम रख लो तुम्हारा ख्याल मैं जी लेता हूँ
तेरे आंसुओ की वजह न बनू आज तुझसे खुद को छीन लेता हूँ
तूम मेरे पास होकर भी मेरे न हो ये एहसास बदल लेता हूँ
चलो दूर होकर तुमसे खुद को तुम्हारा अपना कर लेता हू
अब शायद दोनो के हिस्से सब कुछ आधा आधा आया
बस मैं तुझमे कम और तू मुझमे थोड़ा ज्यादा आया

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