कुछ भी जताता नहीं है – शिशिर मधुकर

जिस से मिली थी मुहब्बत वो पास आता नहीं है
ये दूरी का,मंजर अधिक अब बिलकुल सुहाता नहीं है

ना तोड़े ना छोड़े ये रिश्ता बना जो खुदा के करम से
मन है उसके क्या आखिर वो भी बताता नहीं है

जिसे खुद पे होता यकीं है वो खुल के कहेगा सभी कुछ
वो बातों को अपने जहन में हरगिज दबाता नहीं है

अगर मैल मन में कहीं भी होगा ना जो भी किसी के
अपने सनम से कभी वो कुछ भी छुपाता नहीं है

मैं कैसे जीऊं वो मुहब्बत जो मन से बाहर ना निकले
मधुकर परेशां है साथी कुछ भी जताता नहीं है

शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 04/11/2019
    • Shishir "Madhukar" 04/11/2019
  2. डी. के. निवातिया 05/11/2019
    • Shishir "Madhukar" 05/11/2019

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