रिश्तें – डी के निवातिया !!

 

रिश्ते


पुष्पों से महकते है
कभी, कांटो से चुभते है,
सरिता से बहते है,
कभी, सागर से ठहरते है,
बादल से बरसते है,
कभी, बिजली से गरजते है,
चिड़ियों से चहकते है,
कभी, तितलियों से उड़ते है,
झुलसते क्रोध की उष्मा में,
कभी मृदुता की पुरवाई में लहलाते है,
रेशम से मखमली और नरम,
कभी चट्टानों से अडिग हो जाते है,
समा जाते है यादो की गर्त में
कभी, तल्खियों में उभर आते है,
जम जाते है सूनेपन की बर्फ में
कभी-कभी पिंघल जाय करते
रुमानियत की गर्मजोशी में !!
इनका कोई रंग रूप आकर नहीं होता,
इनके बिन जिंदगी का सार नहीं होता,
बदरंग बेमानी नीरस हो जाता है जीवन
इनके बिना जीने का आधार नहीं होता !!
!
बाज़ार में नहीं बिकते
मगर बड़े अनमोल होते है
रिश्तो का कोई मोल नहीं
अहमियत में बेमोल होते है
ये गुलदानों में नहीं सज़ते
प्रेम भावों के मन मंदिर में बसते है
!
दिखावें का कोई रोल नहीं होना चाहिए,
रिश्तों में कोई झोल नहीं होना चाहिए,
ये जिंदगी की सबसे खूबसूरत दौलत है,
बेमोल है, इनका मोल नहीं होना चाहिए !!
!
डी के निवातिया !!

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11 Comments

  1. C.M. Sharma 25/10/2019
    • डी. के. निवातिया 05/12/2019
  2. Shishir "Madhukar" 05/11/2019
    • डी. के. निवातिया 05/12/2019
  3. Rahul Singh bauddha 03/12/2019
    • डी. के. निवातिया 05/12/2019
  4. Rahul Singh bauddha 03/12/2019
    • डी. के. निवातिया 05/12/2019
  5. Dr.BL Saini 30/12/2019
    • डी. के. निवातिया 01/01/2020
  6. AYAN 31/01/2020

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