ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

न वस्ल की रात आई न अस्ल की रास आई
जुदाई में तंहा रह गये न तुम पास आई।

न चश्म में तुम आये न रश्म में साथ निभाये
न जिगर में उतर पायी न दिल में अभाष आई।


न अश्क निकलने दिया और न रश्क होने दिया
कंठ सूखता रहा मेरा न मुझे प्यास आई।


बरबस जुदाई का आलम छाया रहा दिल में
वहार – ए – जिंदगी में न कोई मधुमास आई।


दर्द – ए – सफ़ीना लिखता रहा रात भर जगकर
आँसू टपकते रहे ख्यालों में त्रास आई।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. C.M. Sharma 25/10/2019
  2. SALIM RAZA REWA 25/10/2019

Leave a Reply