बरसात की एक शाम

बरसात के भीगे मौसम में

ढलती हुई एक शाम में

आओ बैठो साथ में

कुछ बात करते है

कुछ कहते हैं, कुछसुनते है

कुछ अपनी और कुछ अपनों की

यूं तो हर आदमी मशगूल है

अपनी जिंदगी की जुगत में

पर कुछ पल अपनों का साथ

एक सुकून सा दे जाता है

वो तमाम बातें जिन्हें हम नज़रंदाज़ करदेते हैं

जिन्दगी के किसी मोड़ पर हमे अक्सर

वहीं बातें नज़र आ जाती हैं

वहीं बातें फिर दिल को दर्द दे जातीहैं

कहने सुनने का सिलसिला शुरू हुआ

तो भी कुछ अनकही बातों से मानो

वक्त कुछ देर थम सा गया हो

फिर भी वो बात कही नहीं जाती

जो बरसों से दिल में दबी दबी सी है

हर बात कहने और सुनने का

अपना ही नजरिया होता है

जो बात हम कह नहीं पाते

वो भी आप समझ जाते है

चलो बैठ कर कहीं हम इस

सुहाने मौसम का लुत्फ उठाते हैं

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