कबीर छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु



सरसी /कबीर छंद

हंँसी ठिठोली आम बात है, पर निंदा है पाप
वाणी सदा ही निर्मल रहे, बने नहीं अभिशाप।

सादा जीवन ऊँचा विचार, रखना भाई आप
भूले को तुम राह दिखाना, यही बड़ा है जाप।

कर्म अपना कभी मत भूलो, जान भले ही जाय
जैसे दूध दे देती सदा , समंदर धेनु गाय।

जहाँ अँधेरा दिखता तुमको, वहीं जला दो दीप
करनी गर हो कुमति खत्म तो, ज्ञान से बन प्रदीप।

सदैव साथ निभाता कौशल, होता प्रबल -प्रचंड
झुकता नहीं सत्य के आगे , चाहे होता खंड।

झुक जाती सदा है डालियाँ, फल देता जब पेड़
कुछ पेड़ तो झुकते ही नहीं, जैसे देखो बेर।

बड़ों का आदर शिष्टाचार, मूल मंत्र है मेल
इसके बिना है चलता कहाँ, जीवन का ये रेल।

सभ्यता संस्कृति याद रहे, याद रहे श्री राम
हितकारी का काम करो तुम, मत होना बदनाम।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 18/10/2019
  2. डी. के. निवातिया 19/10/2019

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