पांच शे’र – सलीम ‘रज़ा’ रीवा

आईना देख के वो मुस्कुरा के कहते हैंऐसी सूरत भी भला तुमने कहीं देखी है-मेरी तस्वीर में चेहरा बहुत पुराना हैअब जो देखोगे तो पहचानना मुश्किल होगा-आज भी उनकी अदाओं में वही है शोख़ियाँआज भी तकते हैं रस्ता शहर के पागल बहुत-हुस्न पर तो नाज़ उसको ख़ूब था पहले से हीआइने को देख कर वो और भी मग़रूर है-उनको खो देने का तब अहसास हुआरंग-ए-हिना जब देखा उनके हाथों में_______________________________सलीम ‘रज़ा’ रीवा

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 14/10/2019
  2. SALIM RAZA REWA 16/10/2019
  3. Shishir "Madhukar" 19/10/2019
  4. SALIM RAZA REWA 20/10/2019

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