दोस्ती और मुहब्बत – शिशिर मधुकर

दोस्ती और मुहब्बत में फर्क गहरा सा होता है
एक में चैन मिलता है एक में बस ये खोता है

दोस्ती में वो ताकत है ग़मों को दूर ही कर दे
मुहब्बत का मगर जज्बा गमों में ही डुबोता है

दोस्ती आंख में असुअन को भी आने नहीं देगी
मगर उलफत में तो इंसान तकियों को भिगोता है

दोस्ती में हंसी ठठ्ठे और मस्ती भरी होगी
मुहब्बत में मगर इंसान बस सपने पिरोता है

दोस्त गर दूर हो जाएं याद आएंगे वो मधुकर
मगर अलगाव उलफत में तो बस नश्तर चुभोता है

शिशिर मधुकर

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 08/10/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/10/2019

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