जीने का आनंद – डी के निवातिया

ज्ञान बाँटने के लिए दुनियाँ काफी है,
आप बस जीने का आनंद लिया करो !

बेहिसाब बेवक्त अनमोल जिंदगी मिली है,
इसका भी कभी कुछ लुफ्त उठा लिया करो !

न जाने किस रोज़ बुलावा आ जाये रब के घर से,
इसलिए कुछ वक़्त अपनों संग बिता लिया करो !

तमाम जहान होगा सुख दुःख बांटने के लिए,
मगर एक हम ही न फिर कभी नजर आयेंगे !

सब कुछ पाओगें इस दुनियाँ में तुम मगर,
बाद में हमारे लिए तड़पते नज़र आओगे !

ढूंढोगे, दर-बदर, बदहवास, यहां-वहां, कहाँ- कहाँ,
करोगे महसूस अकेलापन तब नाम गुनगुनाओगे !

तभी तो कहते है कभी-कभी हम संग बतियाया करो,
खेलो-कूदों, घूमो-फिरो, संग हमारे आया-जाया करो !

छोडो ये दुनियादारी, ये ज्ञान-ध्यान की दुकानदारी,
अरे कुछ पल तो अपने लिए भी खुलकर जिया करो !

रह जायेगी यही पे धरी दौलत- शोहरत,
कुछ न संग में यहां से किसी के जाना है,
जियो जिंदगी के ख़ास पल अमर कर दो,
पा लो इसे यही तो सबसे बड़ा खजाना है !!

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डी के निवातिया

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 08/10/2019
    • डी. के. निवातिया 03/01/2020

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