गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अपनी गलती सुधार करें हम
ऐसे अपना उपचार करें हम

भटके थे हम तो ज्ञान नहीं था
समाज में बिलकुल नाम नहीं था।
पैसा तो मैं लाया था घर में
पर इसका कहीं सम्मान नहीं था।।

अब सोचा है उपकार करें हम
ऐसे अपना उपचार करें हम ।।

आदत से हम मजबूर हुए थे
खुद की नजरों से दूर हुए थे।
बुरी संगती ने मारा मुझको
नशे की हाल में चूर हुए थे।।

नफरत छोड़ अब प्यार करें हम
ऐसे अपना उपचार करें हम।।

बेहतर हुआ कि समझ में आया
दलदल से अपने आप बचाया।
देर सही पर आँखें खुल गयीं
दूर हो गयी सब ममता माया।।

धर्म – कर्म अब आधार करें हम
ऐसे अपना उपचार करें हम।।

सचमुच का इक इंसान बनेंगे
कुछ ऐसा करके दिखलायेंगे।
यह विश्वास दिलाते हैं सबको
इक हम नया सवेरा लायेंगे।।

अपनी नैया को पार करें हम
ऐसे अपना उपचार करें हम ।।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 05/10/2019
  2. डी. के. निवातिया 05/10/2019

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