किसान की व्यथा

समस्या एक है बहुत ही उत्कट,
आज भी हिन्दुस्तान की
आवाज नहीं है कोई सुनता,
लाचारगरीबकिसान की
समस्या एक है ….

काम कोई पड़ जाए तो फिर,
दौड़े आफिस आफिस
साहब साहब कहता भागे,
तब हो घूस पे काम निखालिस
अन्याय_अनल में जलता है,
स्थिति है लाचारी-हैवान सी
समस्या एक है…….

सबके पेट वो भरता है
पर खुद भूखा सो जाता है
कृतरेशों को न चिंता इनकी,
कौन पूछने जाता है
तरुवर_शाखा से लटकती मिलती,
लाशें अभी किसान की
समस्या एक है ……….

जेवर बर्तन गिरवी रखे थे,
अब कैसे वो घर आये
अब कन्यादान करेगा कौन,
अम्बर नीर पयोनिधि रोये
डोली निकले बेटी की,
कि निकली अर्थी हर अरमान की
समस्या एक है ………….
जय अन्नदाता
नीरज कुमार द्विवेदी

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 22/06/2020
  2. vijaykr811 26/06/2020

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