आज कल उनसे अब

आज कल उनसे अबमेरी पहले की तरह बात नहीं होतीअब पहले की तरहमुलाकात भी नहीं होतीउनकी चूड़ियों की खनकअब मुझे सुनाई ही नही देतीउनके जाने सेमेरा जमाना चला गयामेरा आशियाना टूट गयाज़िन्दगी तो अब भी हैपर रवानी बीत गयीसाँसे तो हैसाँसों की कहानी बीत गयीशाम की दहलीज पर बैठे-बैठेरात को सुबह का इल्म नहीं होताचाँद तो निकलता है रोज हीपर उसकी चांदनी से मेरा घर अबरोशन नहीं होतामुझे कदम-कदम पेभटकने को छोड़ करक्यों उसने अपना कारवाँ बढ़ा दियाअभी तो प्यास अधूरी थी मेरीफिर क्यों उसने अपना रुख बदल लियाजाना ही था तोकदमों के निशान छोड़ कर जाती नाऐसे क्यों जाते-जाते धूल उड़ा दिया–अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma 01/10/2019

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