नवजात परी:-विजय

जान है तू एक नन्ही सी
जान बन गयी पापा-मम्मी की
करती जब-जब तू किलकारी
झूम उठे सब आंगनबाड़ी

लगती तू गुड़िया रुई की
नाजुक तू छुईमुई सी
होठ तेरे जैसे फूल-पंखुरी
गाल लगे जैसे हो रसभरी

आँख है लगते तारे टिमटिम
आंसू लगते बारिश रिमझिम
मुट्ठी बाँध रखी है ऐसे
सारी दुनिया इसमें हो जैसे

चमक रहा माथा है इतना
तेज़ सूरज में होता है जितना
सूरत तेरी सब पर ऐसी छाई
चाँद भी लगे तेरी परछाई


बोली तेरी एक उलझन है
दिल धड़के तू वो धड़कन है
मुस्कान तेरी एक माया है
सब चिंता को दूर भगाया है

आसमां में हाथ-पैर यूँ मार रही
छूटी चीज़ कोई रब से मांग रही
नज़रें उसकी इसको-उसको तारे
फर्क न करती कौन अपने कौन पराये

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