गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सपनों में सब डूबे क्यों हैं
इतने बड़े अजूबे क्यों हैं।।

देखें वह इतिहास पलट कर
लोग हसेंगे उलट – पलट कर।
भ्रांति जब तेरे मन में आये
आँखों में सपने छा छाये।।

जिगर में आके चुभे क्यों हैं
इतने बड़े अजूबे क्यों हैं।।

गहरे नींद में सपने आते
ये सपने भी कुछ कह जाते।
ख्वाबों की तो बात अलग है
खुली आँख में सब रह जाते।।

अब बताओ सब ऊबे क्यों हैं
इतने बड़े अजूबे क्यों हैं।।

सोचने को सब लोग सोचते
आंँसू को हर रोज पोछते।
अपने ऊपर विश्वास जमाओ
तुम किस्मत को क्यों कोसते।।

हर इक शख्स गु़रूबे क्यों हैं
इतने बड़े अजूबे क्यों हैं।।

ग़रूबा – पूरी तरह से डूब जाना।

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 26/09/2019
    • Bindeshwar prasad sharma 27/09/2019
  2. डी. के. निवातिया 26/09/2019
    • Bindeshwar prasad sharma 27/09/2019

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