गीत -क्या कवि बालमीकि मर्यादा

क्या कवि बालमीकि मर्यादा ,चूर चूर हो जायेगी ?

सूर कबीर और तुलसी की कविता क्या बिलखायेगी ?

 

 

कवि कुल की मर्यादा में हम, दाग नही लगने देंगें |

भर्तहरी के नीतिशतक में, आग नही लगने देंगें ||

मेघदूत वापस जाकर तुम ,कालिदास से कह देना |

अब कवियों की वाणी भूषण ,के छंदों को गायेगी ||

 

 

सुनों प्रार्थना बालमीकि भेजो, लवकुश प्रतिमानों को |

अब ग़ालिब जी वीर बना दो, प्रेमी औ दीवानों को ||

वीर विक्रमादित्य तुम्हारा, दीपक राग कहाँ सोया ?

क्या विदूषकों की टोली अब, कवियों को भरमायेगी ?

 

 

ह्रदय टूटने से भी कवि की, कलम नही टूटा करती |

भाग्य रूठ जाये पर कवि से, प्रकृति नही रूठा करती ||

कवियों का उपहास हो रहा, विदूषकों की महफ़िल में |

तानसेन तुम राग बजाओ ,कविता पबि पिघलायेगी ||

 

 

रस विलास औ चल चितवन ने, क्या कवि को ललकारा है ?

क्या मृगनैनी का आँचल ही, कवि का एक सहारा है ?

आन भर्तहरि औ तुलसी की, कवियों मत नीलाम करो |

विदा कहो गलबाहों से कवि, कीर्ति ध्वजा फहरायेगी ||

 

 

सावधान! मोहन हो जाओ ,मीरा रचने गीत लगी |

राम चन्द्र जी सुनों ध्यान से, तुलसी उर में प्रीत जगी ||

निर्गुण ईश्वर कबिरा  से अब, मिलने मगहर जायेगा |

भक्तिमयी कवि  कीर्ति पताका, लहर लहर लहरायेगी ||

 

 

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

9582510029

 

 

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7 Comments

  1. C.M. Sharma 26/09/2019
  2. डी. के. निवातिया 26/09/2019
      • डी. के. निवातिया 15/10/2019
  3. Dr.M.C. Gupta 11/10/2019

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