ग़ज़ल – कहूँ तो किस से कहूँ…

तुम्हीं सुनो न हकीकत कहूँ तो किस से कहूँ…
मैं अपने दिल की तबीयत कहूँ तो किस से कहूँ…

तुम्हारे प्यार में ज़िंदा जला मरा न मगर….
मेरी थी मुझसे अदावत कहूँ तो किस से कहूँ…..

मचा है शोर जफ़ा ज़ुल्म तेरे रुतबे का…
न तुम में सुनने की ज़ुर्रत कहूँ तो किस से कहूँ….

सभी ने रोका मगर इश्क़ रोग ले ही लिया…
हुई है अब जो फ़ज़ीहत कहूँ तो किस से कहूँ…

ये लोग कहते मुझे हिज्र तेरा ले डूबा…
तेरे सिवा ये हकीकत कहूँ तो किस से कहूँ…

न जानता हूँ जिसे दौड़ता वही खूं में…
जुनूँ-ए-दिल की ये वहशत कहूँ तो किस से कहूँ…

हलाल करती मुझे हर अदा तेरी “चन्दर”.…
तुझे पता है अज़ीयत कहूँ तो किस से कहूँ…

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/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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10 Comments

  1. sarvajit singh 24/09/2019
    • C.M. Sharma 26/09/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma 24/09/2019
    • C.M. Sharma 26/09/2019
  3. डी. के. निवातिया 24/09/2019
    • C.M. Sharma 26/09/2019
  4. Shishir "Madhukar" 26/09/2019
  5. C.M. Sharma 03/10/2019
  6. SALIM RAZA REWA 13/10/2019
  7. C.M. Sharma 14/10/2019

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