अल्फाज़

कल रात भर

अल्फाजो़ं की बारिश होती रही

कुछ बेहद नर्म और मुलायम

तो कुछ पत्थर से सख्त

मैं भीगती रही उस बारिश में

कुछ अल्फाज़ फर्श पर गिरे

तो कुछ दीवार से चिपके रहे

कुछ हवा में उड़ कर वार करते रहे

थक कर न जाने कब आँख लग गई

सुबह आँख खुली

तो सन्नाटा था

बारिश थम चुकी थी

पर कुछ अल्फाज़ अब भी

मेरे बदन से चिपके थे

यकीनन् ये तुम्हारे ही होंगे

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/06/2020
  2. vijaykr811 vijaykr811 26/06/2020

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