तेरा रूठना – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

तेरा रूठना, मेरा मनाना
मुझे कितना अच्छा लगता है।
तेरा हर जज्बा, तेरी हर अदा
प्यार में सब सच्चा लगता है।।

दिल की बात, दिल से मिल जाये
भेद – भाव के होठ, सिल जाये।
तब रिश्ता, आपस में बंधता
जब दो फूल, दिल में खिल जाये।।

आँखो में उतरकर, जब आती
जिगर में अपना, घर कर जाती।
जमाना , चाहे जितना रोके
पागल या दिवाना, कर जाती।।

जान जाये – रहे, डरता नहीं
सदियों से जिंदा, मरता नहीं।
तड़पता है और तरसता है
कसक होती, आहें भरता नहीं।।

दिल ए जख्म गहरा जितना भी हो
मिलते हैं , पहरा कितना भी हो।
हौसला कभी, मार खाता नहीं
दिल सुने, बहरा जितना भी हो ।।

इश्क करते हैं , हारते ही नहीं
दिल वो अपना, मारते ही नहीं।
क्या बताए बिन्दु” गुमराह में
खुमार – खौफ,उतारते ही नहीं।।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 24/09/2019
  2. डी. के. निवातिया 24/09/2019

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