बेहतर है…..

धारा 370 के ऐतिहासिक निर्णय पर ,लद्धाख के प्रतिनिधि के भाषण के विचारों मे बांधने का प्रयत्न किया है,

उस अनजान कोलाहल से,

परिचत सन्नाटा बेहतर है।

गीदड़ की चहल-पहल से तो,

सिहों का आना बेहतर है।

अब बदल रहा है देश मेरा,

मेरा साथ निभाना बेहतर है।

पत्थरबाजों की चोटों से,

विपक्ष का चांटा बेहतर है।।

उस अनजान कोलाहल से,…

अब देश मेरा है एक हुआ,

हर एक ठिकाना बेहतर है।

घाटी में खून की होली से,

चुप ईद मनाना बेहतर है।

थे पृथक पड़े हम वर्षो से,

ये पुनर्गठन ही बेहतर है।

दुश्मन के जहर लुभावन से,

जो आप ने डांटा बेहतर है।।

उस अनजान कोलाहल से……

कुछ पंक्तियां उनके लिए जो इसके विरोध में है ंं….

तुम पहन लो लाखों के जूते‌ ,

अय्याशी की कर करतूतें,

मेरे बदन में खादी गांधी की,

पैरों में बाटा बेहतर है,।।

उस अनजान कोलाहल से…

आतंकवाद की हरियाली से,

घाटी में सूखा बेहतर है,

हारामखोरों की खाने से,

हर बंदा भूखा बेहतर है।।

सिहों की बलि चढ़ाने से,

बेहतर है खटमल मर जाएं ,

और भी बेहतर होगा गर,

कश्मीरी पंडित घर जाएं,।।

घाटी के मरघट बनने से,

संसद में दंगा बेहतर है।

एक विधान,एक प्रधान,

अब एक तिरंगा बेहतर है।।

उस अनजान कोलाहल से,

परिचित सन्नाटा बेहतर है।।।।

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