उजागर:-विजय

झूठ मुख से जितना जो कह दे
पर आँखे सब सच कह देती हैं
लाख छुपाये दर्द दिलो का
आँखों की बूंदे सब कह देती हैं

महफ़िल में जितना खिलखिलाओ
सिकन माथे की सब बतला देती है
दावा साहस का जितना भी कर लो
चाल कदम की सब बतला देती है

वैभवगान जितना भी कर लो
जूतों की कीलें सब कह देती है
लाख ज्ञानी होने का दंभ तुम भर लो
वाणी की मधुरता सब कह देती है

प्रेम-माला जितना भी फेरो
डगर कठिन सब बतला देती है
धर्मात्मा का पाखंड जितना भी कर लो
मात-पिता की दशा सब बतला देती है

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 20/09/2019
    • vijaykr811 22/09/2019

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