हमारी हिंदी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हमारी हिन्दी

हम हिंदी हिन्दुस्तान हमारा
इस भूतल से सम्मान हमारा।
हर भाषा का ज्ञान है फिर भी
धर्म निरपेक्ष परिधान हमारा।।

हर जेहन कीअविरल भाषा
हिन्दी सबकी है अभिलाषा।
कितनी सुंदर सरल है वाणी
समता जैसे दूध – बताशा।।

ऋषि मुनी गुणियों की थाती
शब्द कभी किस्मत चमकाती।
शब्दों से ही रसखान बन गये
तुलसी दास महान बन गये।।

गंगा सी पावन है हिन्दी
कश्मीर मेरे भारत की बिंदी।
सभ्यता में संस्कृत बसी है
धर्म मजहब जागीर है हिन्दी।।

प्रेम की भाषा यह कहलाती
पुरखों की वह याद दिलाती।
चाहे जितनी भी हो भाषा
सबको आपने आप लुभाती।।

बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु
बाढ़ – पटना

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