विधा: तज़मीन – ग़ज़ल जनाब नक्श लायलपुरी साहिब … “ये मुलाकात इक बहाना है…”

इश्क़ जन्नत, अदू ज़माना है…
इसका सदिओं रहा फ़साना है…
रोज़ हर इक नया तराना है…
“ये मुलाकात इक बहाना है..
प्यार का सिलसिला पुराना है….”

भूल कर भी न हम भुला पाएँ…
हर कदम साथ हम निभा जाएँ…
प्यार के आसमाँ को पा जाएँ…
“धड़कनें धड़कनों में खो जाएँ
दिल को दिल के करीब लाना है”

ख़्वाब जीती हूँ तेरी आँखों में…
झूल कर रोज़ तेरी बाँहों में….
तू खुदा है मेरी निगाहों में….
“मैं हूँ अपने सनम की बाहों में
मेरे कदमों तले ज़माना है “

देखना ख़्वाब दिल की चाहत है…
आग में कूदने की आदत है…
कुछ रकीबों की भी अदावत है…
“ख़्वाब तो कांच से भी नाज़ुक है
टूटने से इन्हें बचाना है”

आप का साथ हमने पाया है….
प्यार में ये करिश्मा आया है…
जिस्म जां सब बना देवाला है…
“मन मेरा प्यार का शिवाला है…
आप को देवता बनाना है”
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/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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8 Comments

  1. davendra87 15/09/2019
    • C.M. Sharma 17/09/2019
  2. Bindeshwar prasad sharma 16/09/2019
    • C.M. Sharma 17/09/2019
  3. Meena Bhardwaj 19/09/2019
    • C.M. Sharma 24/09/2019
  4. डी. के. निवातिया 20/09/2019
  5. C.M. Sharma 24/09/2019

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