ईमान – शिशिर मधुकर

पास हीरा भी रहे अगर जो ज्ञान ना हो
एक पत्थर की तरह उसका भी मान ना हो

कौन पूछेगा हमें सबको अपनी है पड़ी
भूल जाएंगे सभी जो तेरा एहसान ना हो

रिश्ते नाते भी कहीं निभा करते हैं वहां
जहां मतलब हो बड़ा कोई ईमान ना हो

ऐसी मस्जिद की हमें कोई ख्वाहिश ही नहीं
जिसमें सब कुछ हो मगर पाक आजान ना हो

उसकी दौलत को कभी मधुकर शौहरत ना मिली
जिसकी फितरत में कोई जज्वा ए दान ना हो

शिशिर मधुकर

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5 Comments

  1. C.M. Sharma 17/09/2019
    • Shishir "Madhukar" 20/09/2019
  2. C.M. Sharma 17/09/2019
  3. डी. के. निवातिया 20/09/2019
    • Shishir "Madhukar" 20/09/2019

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