दोहे भगवान महावीर वचन

भगवान महावीर की, बात धरी संदूक।
मानवता को त्यागकर, उठा रहे बंदूक // १. //

अपने घट में झाँककर, खुद से कर पहचान।
इस विधि हर इक जीव को, मिला आत्म सम्मान // २. //

सच्ची अहिंसा है वही, जो फैलाये शांति।
जीत सके जो आत्म को, फैलाये न अशांति // ३. //

इस जग में हर जीव का, सब विधि हो कल्याण।
वसुंधरा में चार सू, चलें प्रीत के वाण // ४. //

पृथक-पृथक सब जीव हैं, कोई न परातन्त्र।
सबमें है परमात्मा, हरेक यहाँ स्वतन्त्र // ५. //

वह नर उत्तम नर नहीं, जो व्यसनों का दास।
स्वयं को जो जीत ले, वो नर बनता ख़ास // ६. //

—महावीर उत्तराँचली (शा’इर/कवि व कथाकार)

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5 Comments

  1. Mahavir Uttranchali 13/09/2019
  2. C.M. Sharma 17/09/2019
    • Mahavir Uttranchali 19/09/2019
    • Mahavir Uttranchali 19/09/2019
  3. डी. के. निवातिया 20/09/2019

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